IP Address क्या है – IP Address के प्रकार और यह काम कैसे करता है विस्तार से जानिए

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IP Address क्या है? IP Address के प्रकार और यह काम कैसे करता है विस्तार से जानिए –

 

हेल्लो दोस्तों इस आर्टिकल में आप IP Address के बारे में जानेगे । IP Address क्या है?, IP Address कितने प्रकार के होते हैं?, IP Address का Structure, IP Address के versionIP Address के Classes, IP Address काम कैसे करता है आदि के बारे में जानेगे। साथ ही Computer और Mobile Phone में IP Address का पता कैसे करे के बारे में भी जानेगे 

IP Address

इंटरनेट का उपयोग करते समय हम सभी डाटा को एक जगह से दूसरी जगह भेजते हैं और रिसीव भी करते हैं, इस पूरी प्रक्रिया में IP address को काम में लिया जाता है। इंटरनेट के इस्तेमाल के लिए IP address का होना अनिवार्य है। IP address को Internet का Passport भी कहा जाता है। क्या आप जानते हैं IP address क्या है? अगर नहीं तो यह आर्टिकल पूरा जरूर पढ़ें …

 

IP Address क्या है? (What is IP Address) :-

IP address का पूरा नाम Internet protocol address हैं। IP Address  इंटरनेट पर उपयोगकर्ता (user) की पहचान होती है। इसे नंबरों (0-255) से दर्शाया जाता है। जिस प्रकार एक घर या ऑफिस का एड्रेस होता है उसी प्रकार इंटरनेट का समर्थन करने वाले स्मार्ट डिवाइस का भी अपना एक एड्रेस होता है। जिसे हम IP address कहते हैं। इसे लॉजिकल एड्रेस भी कहा जाता है। यानि IP address हमारे स्मार्टफोन, कंप्यूटर, लैपटॉप और दूसरे स्मार्ट डिवाइस पर मौजूद होता है।

 

IP Address का Structure :-

आईपी एड्रेस को 4 digit के सेट के रूप में दर्शाया जाता है। उदाहरण के लिए 197.143.1.29 सेट का प्रत्येक नंबर 0 से 255 तक हो सकता है, इसलिए कुल आईपी ऐड्रेस की रेंज 0.0.0.0 से 255.255.255.255 तक हो सकती है। आमतौर पर IP Address को दो भागों में बांटा जा सकता है – Network Address और Host Address.

Network Address – 

यह आईपी एड्रेस के शुरुआती तीन नंबर है जो डिवाइस की लोकेशन के हिसाब से विशेष नेटवर्क की पहचान करते हैं। घर के सामान्य नेटवर्क के भीतर जहां डिवाइस का आईपी ऐड्रेस 197.143.1.29 है। इसमें एड्रेस का 197.143.1 वाला हिस्सा Network Address होगा। इसे शून्य के साथ 197.143.1.0 लिख सकते हैं।

Hosting Address – 

यह आईपी ऐड्रेस का वह हिस्सा है जो Network Address के बाद बच गया है। यह नेटवर्क में किसी विशेष डिवाइस (जिसे TCP या IP  दुनिया में ‘Host’  कहा जाता है ) की पहचान करता है। जैसे कि आईपी ऐड्रेस 197.143.1.29 में Hosting Address ‘29’  होगा जो 197.143.1.0 नेटवर्क पर यूनिट Hosting Address है।

 

IP Address के version :-

 IPv4 –

IPv4 का पूरा नाम internet protocol version 4 है, यह इन्टरनेट प्रोटोकॉल का चौथा version है। IPv4 में IP address 32 बिट्स का होता है। इसे 8 bits के 4 blocks में विभाजित (divide) किया जाता है।

 यह एक connectionless प्रोटोकॉल है जिसका प्रयोग packet switched layer नेटवर्क्स (जैसे:-Ethernet) में किया जाता है। इसका प्रयोग नेटवर्क में data packets को होस्ट डिवाइस से डेस्टिनेशन डिवाइस तक deliver करने में किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल एक network में devices को identify करने के लिए किया जाता है उदाहरण– 192.106.254.201 आदि  

IPv6 –                                                                         

IPv6 का पूरा नाम internet protocol version 6 है। यह internet protocol (IP) का सबसे नया version है तथा इसमें IPv4 से ज्यादा बेहतर तथा advanced विशेषताएं (features) है इसे IETF (internet engineering task force) ने 1998 में विकसित किया था।

IPv6 का साइज़ 128 bits का होता है। और यह भविष्य में IPv4 की जगह कार्य करेगा। इस समय यह IPv4 के साथ मिलकर कार्य करता है। उदाहरण 3FBB:1806:4545:2:100:L8FF:FE21:P75 आदि

IPV4 और IPV6 में अंतर :-

IPv4 IPv6
Length 32 bits Length 128 bits
Total octet 4 Total octet 8
Range 0 to 255 Range 0 to 65535
4 billion IP address 340 IPv4 और IPv6 में अंतर trillion ip address
Example- 192.168.10.26 Example- 3FBB:1806:4545:2:100:L8FF:FE21:P75

 

IP Address Classes :-

IPv4 में नेटवर्क डिवाइसों के लिए Addressing System को पांच क्लासेज में बांटा गया है। प्रत्येक क्लास को उसके first octel के आधार पर पहचाना जाता है –

IP Address Classes

Class A IP Address –

जिन IP Address के first octet की रेंज 0 से 127 तक होती है उन्हें class A आईपी ऐड्रेस कहा जाता है। क्लास A की IP रेंज 1.x.x.x से 127.x.x.x तक होती है। क्लास A डिफॉल्ट सबनेट मास्क 255.0.0.0  होता है। क्लास A में मैक्सिमम 126 नेटवर्क एड्रेस तथा 16777214 Host एड्रेस उपलब्ध होते हैं।

Class A Address

Class A का उपयोग बहुत बड़े-बड़े ऑर्गेनाइजेशन में किया जाता है जिसके नेटवर्क में होस्ट की संख्या बहुत अधिक होती है, उन कंपनी में क्लास A का प्रयोग किया जाता है।

Class B IP Address –

जिन IP Address की रेंज 128.0.x.x से 191.255.x.x तक होती है उन्हें Class B Addresses कहा जाता है। Class B का डिफॉल्ट सबनेट मास्क 255.255.0.0  होता है। क्लास B में मैक्सिमम 16384 नेटवर्क एड्रेस तथा 65534 Host एड्रेस उपलब्ध होते हैं। 

Class B IP Address

Class C IP Address –

जिन IP Address की रेंज 192.0.0.x से 223.255.255.x तक होती है उन्हें Class C Addresses कहा जाता है। क्लास C का डिफॉल्ट सबनेट मास्क 255.255.255.0 होता है और क्लास C में मैक्सिमम 2097152 नेटवर्क एड्रेस तथा 254 होस्ट एड्रेस उपलब्ध होते हैं। 

Class C IP Address

क्लास C में आईपी ऐड्रेस का 3 पार्ट नेटवर्क के लिए तथा एक पार्ट होस्ट के लिए उपयोग होता है तथा अर्थात् क्लास C में नेटवर्क की संख्या नोट की संख्या से काफी अधिक होती है। छोटे-छोटे कंपनी, साइबर कैफे, स्कूल, कॉलेज इत्यादि में इसका उपयोग होता है। Class C का उपयोग अन्य सभी Class से अधिक होता है। 

Class D IP Address –

जिन IP Address की रेंज 224.0.0.0 से 239.255.255.255 तक होती है उन्हें क्लास D एड्रेस कहा जाता है। Class D में कोई भी सबनेट मास्क नहीं होता है। Class D को मल्टीकास्टिंग के लिए रिजर्व रखा गया है। 

IP Address Classes

Class E IP Address –

जिन IP Address की रेंज 240.0.0.0 से 255.255.255.255 तक होती है उन्हें Class E Addresses कहा जाता है। Class E में कोई भी सबनेट मास्क नहीं होता है। Class E को Experimental Purpose & Study के लिए रिजर्व रखा गया । 

 

IP Address कितने प्रकार के होते हैं? :-

IP Address कुल चार प्रकार के होते हैं जो की इस प्रकार हैं

  1.   Public
  2.   Private
  3.   Static
  4.   Dynamics

 

1. प्राइवेट आईपी एड्रेस (Private IP Address)

इस प्रकार के आईपी एड्रेस को नेटवर्क  राउटर आपके डिवाइस को Assign किया जाता है। नेटवर्क के अंदर हर एक डिवाइस को एक अलग आईपी एड्रेस Assign किया जाता है। और इस प्रकार से प्राइवेट नेटवर्क के अंदर सारे के सारे Devices एक दूसरे से कम्यूनिकेट करते हैं।

2. पब्लिक आईपी एड्रेस (Public IP Address)

जब आईपी एड्रेस हमारे Internet Service Provider के माध्यम से हमारे नेटवर्क राउटर को Assign किया जाता है तो इसे ही हम पब्लिक आईपी एड्रेस कहते हैं।

हर डिवाइस का एक प्राइवेट आईपी एड्रेस भी होता है, परंतु, जब हम उसे इंटरनेट से जोड़ने की कोशिश करते हैं, तो वो हमारे राउटर के पब्लिक आईपी एड्रेस के द्वारा जुड़ता होता है। यही वजह है कि उसके प्राइवेट आईपी एड्रेस को छिपना पड़ता है। इसका मतलब यह है कि दूसरे किनारे पर केवल हमारे Router का Public IP Address नजर आता है।

 3. स्टेटिक आईपी एड्रेस (Static IP Address)

स्टेटिक आईपी एड्रेस एक तरह का ऐसा आईपी एड्रेस है जो की एक कंप्यूटर नेटवर्क में मैन्युअल क्रिएट किए गए होते हैं।जैसे कि नाम से स्पष्ट है यह आईपी एड्रेस कभी भी बदलता नहीं है।

4. डायनेमिक आईपी एड्रेस (Dynamics IP Address)

डायमेनिक आईपी एड्रेस एक तरह का ऐसा आईपी एड्रेस होता है जिसे वक्त वक्त पर बदलते रहता है। यही नहीं यह एक ऐसा आईपी एड्रेस है जो कि खुद पर खुद Assign होता रहता है। जिस भी समय आपके पब्लिक इंटरनेट का उपयोग करते हैं, तो आपको डायनेमिक आईपी एड्रेस Assign किया जाता है। जो कि तनिक वक्त तक ही मान्य होती है।

 

 IP Address का इतिहास (History of IP Address) :-

वर्तमान समय में इंटरनेट की इस दुनिया में दो IP Address का इस्तेमाल किया जाता है। IPv4 और IPv6. आईपी एड्रेस का मूल संस्करण 1983 में Arpanet द्वारा विकसित किया गया।

IPv4 Address 32 बिट का होता है, जिसमें 4,297,967,296 ऐड्रेस स्पेस सीमित होता है। IPv4 में कुछ एड्रेस विशेष कार्यों के लिए Private Network (18 मिलियन) तथा Multicast Addressing ( 270 मिलियन) आरक्षित (Reserved)  है।

आमतौर पर IPv4 Dot Decimal Notation के रूप में Present किया जाता है। जिसमें 4 गणितिय अंक होते हैं तथा प्रत्येक Range 0 से 255 तक बिंदुओं के रूप में विभाजित होता है। प्रत्येक भाग 8 Bits (Octet) का बना होता है।

परंतु समय के साथ बढ़ते इंटरनेट यूजर्स के कारण उपलब्ध आईपी एड्रेस में कमी के कारण 1995 में आईपी एड्रेस में 132 उपयोग कर नया डिजाइन दिया गया जिस सिस्टम को इंटरनेट प्रोटोकोल 6 के नाम से जाना गया। IPv6 तकनीकी को वर्ष 2000 तक विभिन्न Testing प्रक्रियाओं के दौर से गुजारा गया तब कमर्शियल उत्पादन की शुरुआत हुई।

IPv4 तथा IPv6 के बीच IPv5 1979 के Experiment Interne Protocol Stream पर आधारित था। हालांकि IPv5 को कभी भी लॉन्च नहीं किया गया था।

वर्तमान समय में IPv4 तथा IPv6 दोनों का आधुनिक डिवाइस में उपयोग किया जाता है। दोनों IP Versions में तकनीकी बदलाव के कारण IP Address Formation में विभिन्नता देखी जा सकती है।

 

IP Address काम कैसे करता है :-

जब भी आप ऑनलाइन होकर किसी Website से कोई file डाउनलोड करते हैं या कोई email भेजते हैं तो उसमें आप एक नेटवर्क का उपयोग कर रहे होते हैं जो खुद को इंटरनेट से जोड़े हुए होता है। इस दौरान आपका डिवाइस घर के इंटरनेट सेवा प्रदाता (ISP) से कनेक्ट करता है या आप ऑफिस में है तो कंपनी नेटवर्क का उपयोग करता है।

यह सब करने के लिए आपका  Computer या Smartphone इंटरनेट प्रोटोकॉल का इस्तेमाल करता है। जिसमें आपको आईपी एड्रेस का इस्तेमाल कनेक्शन स्थापित करने के लिए Return Address के तौर पर किया जाता है। 

 

Computer और Mobile Phone में IP Address का पता कैसे करे :-

IP Address पता करने के दो तरीके है –

Internet Search के द्वारा –

सबसे पहले आप जिस डिवाइस (Mobile या Computer) का IP Address जानना चाहते हैं। उस डिवाइस में किसी भी एक Web browser को खोल लीजिए।

अब browser के सर्च बॉक्स में What is my IP  लिखिए और enter दबा दीजिए। ऐसा करते ही आपके डिवाइस का आईपी ऐड्रेस आ जाएगा।

Command Prompt द्वारा –

Computer में –

सबसे पहले अपने कंप्यूटर के Windows Start Button पर क्लिक कीजिए और सर्च बॉक्स में cmd टाइप कीजिए।

ऐसा करते ही Command Prompt आपके सामने आ जाएगा। अब cmd Icon के ऊपर राइट क्लिक कीजिए और Run as Administrator को सेलेक्ट कीजिए। 

अब आपके सामने Windows Command Prompt Open हो जाएगा। इसमें की-बोर्ड की सहायता से ipconfig टाइप कीजिए और enter दबा दीजिए। अब आपके सामने विंडोज पीसी का आईपी ऐड्रेस आ जाएगा।

 Mobile में –

अपने मोबाइल का आईपी एड्रेस पता करने के लिए सबसे पहले settings पर जाएं और उसमें About device ऑप्शन पर क्लिक कीजिए ।

अब About device में Status को सिलेक्ट कीजिए। Status में आपको कई और जानकारियों के साथ आईपी एड्रेस भी दिखाई देगा।

Settings>About Device>Status

 

कौन IP Address को Manage करता है :-

IP Address के लिए IANA (Internet Assigned Numbers Authority) जिम्मेदार है। लेकिन आईपी एड्रेसेज को Distribute करने के लिए अलग-अलग Regions के हिसाब से अलग-अलग इकाईया काय काम करती है। पूरी दुनिया में 5 Regional Internet Registries (RIRs) में बंटी हुई है –

ARIN (American Registry For Internet Numbers)

LACNIC (Latin American And Caribbean Internet Addresses Registry)

APNIC (Asia Pacific Network Information Center)

AFRINIC (African Network Information Center)

RIPE NCC (Reseaux IP Europeens Networks Coordination Center)

इस वक्त दुनिया में यह 5 RIRs कार्यरत है। IANA इन 5 RIRs को आईपी एड्रेसेज के बड़े-बड़े ब्लोक्स प्रोवाइड करवाती है। ये पांचों अपने अपने Region के ISPs, Local Registries और Specific Users को उनकी जरूरत के हिसाब से IP Addresses Assign करती है। उसके बाद ISPs (Internet Service Providers) हमारे जैसे यूजर को Assign कर देते हैं। इसके लिए कड़े Rules and Regulations फॉलो किए जाते हैं साथ ही प्रत्येक आईपी एड्रेस का रिकॉर्ड रखा जाता है।

 

क्या मोबाइल में सिम कार्ड बदलने पर  IP Address बदल जाता है? :-

हाँ, सिम कार्ड बदलने पर IP address बदल जाता है. एक नेटवर्क के भीतर सभी devices को अलग-अलग IP addresses दिए जाते हैं. ऐसे में जब भी आप किसी नए नेटवर्क में शामिल होते हैं तब आपका IP Address भी बदल जाता है.

 

निष्कर्ष (Conclusion) :-

 इस आर्टिकल में हमने आपको IP address के बारे में पूरी जानकारी दी है। इसको पढ़ने के बाद आपको समझ में आ गया होगा कि IP address का Internet की दुनिया में क्या उपयोग है। उम्मीद है आपको IP Address क्या है? और IP Address कैसे कार्य करता है के बारे में जानकारी अच्छी तरह से समझ में आ गई होगी।

 

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